नज़्म - माँ का आंचल
भले ही इश्क़ बेपनाह है तुमसे मुझे,
मगर उसके लिए में अपनी माँ का आंचल ना भुला पाऊँगा,
लाख दो तुम अपने प्यार की दुहाई मुझे,
मगर उसके लिए में अपनी खुदाई ना भुला पाऊँगा,
अगर प्यार सच्चा है तुम्हें मुझसे,
तो प्यार के बटवारे की बात क्यों कर रहे तुम,
जिन्होने उंगली पकड़ कर चलना सिखाया,
उन्हें छोड़ कर चलने की बात क्यों कर रहे तुम,
सात फेरों का मतलब बरखुब समझता हूँ में,
मगर दिन में साथ बार नज़र उतारने का मतलब,
में तुम्हें ना समझा पाऊँगा,
भले ही इश्क़ बेपनाह है तुमसे मुझे,
मगर उसके लिए में अपनी माँ का आंचल ना भुला पाऊँगा |
Author - Vikash soni

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